एक दिन हम जुदा हो जायेंगे

“यह एक काल्पनिक कहानी है, इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं और किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से इस कहानी का कोई लेना देना नहीं है, जगह का नाम, या कोई पदवी अत: सब काल्पनिक हैं | किसी के साथ यह दुर्घटना असली जिन्दगी में हुई है तो हमें खेद है ”

मेरे प्यारे दोस्तो, मैं आपकी ” उमा शर्मा “आपकी सेवा में अपनी नयी सेक्स कहानी पेश कर रही हूँ. इस कहानी में हो सकता है कि कई जगह ग़लतियां हों, जो हिन्दी में लिखते हुए ना चाहते हुए भी हो जाती हैं. इसलिए पहले ही निवेदन है कि गलतियों को नजरअंदाज करते हुए कहानी का आनन्द लीजिएगा और इस कहानी को लेकर अपने विचार ज़रूर मेल कीजिएगा. यह कहानी मेरे द्वारा ही लिखी गई है.

अगर किसी पाठक को ये कहानी पसंद ना आए तो प्लीज़ वो इसे बीच में ही पढ़ना छोड़ दें, क्योंकि अगर अच्छी नहीं है तो फिर इसको आगे पढ़ने में अपना समय किस लिए बेकार में लगाना.
मैं उन पाठकों के सुझावों का दिल से स्वागत करूँगी, जो मुझे अपनी कहानी के लिखने में सुधार का कोई भी सुझाव दें. उन पाठकों से जो मुझे कोई कॉलगर्ल, रंडी या दलाल समझते है, वो कृपया मुझे कोई मेल भेजने का कष्ट ना करें क्योंकि मैं उन सभी मेल्स को बिना पूरा पढ़े डिलीट कर देती हूँ और आगे भी यही करूँगी.
यह कहानी बिल्कुल सच्ची है और जिसके साथ घटित हुआ है, उसे मैं जानती हूँ… और क्योंकि उसकी पहचान को पूरी तरह से छुपाना था, इसलिए पूनम को इस कहानी की नायिका बनाना ही उचित समझा .एक लड़की के साथ किस तरह से लोग उसकी दुर्दशा करते हैं… इस बात को समझा जाए, यहाँ तक कि उसके अपने सगे भी उसे मुसीबत के समय डूबने के लिए छोड़ जाते हैं.
दोस्तो, लड़की को यहाँ इस दुनिया में लगभग सभी देशों में एक वस्तु माना जाता है. जिसका काम अपनी चूत से लंडों की सेवा करना है. यही सोच रख कर आम तौर पर लोग अपना जीवन गुजारते हैं. मुझे याद है, जब मैंने हाईस्कूल पास किया था, तो सभी लोग बहुत खुश हुए थे. क्योंकि मेरे अच्छे नंबर आए थे, इसलिए बिना किसी मुसीबत के मुझे कॉलेज में दाखिला भी मिल गया. चूंकि हमारे गाँव में कोई कॉलेज नहीं था, इसलिए मुझे सिटी में जाकर पढ़ना पड़ा. शहर हमारे गाँव से काफ़ी दूर था और रोज़ आना जाना बहुत मुश्किल था. मेरे एक चाचा वहीं सिटी में रहते थे, इसलिए मैं उनके घर पर जाकर रहने लग गई. उनके पड़ोस में एक परिवार हमारी ही बिरादरी का रहता था, जिनका एक लड़का भी था. वो आते जाते मुझ पर कुछ ना कुछ उल्टा सीधा बोलता था.
एक दिन मैंने उसको एक कस के थप्पड़ दे मारा… क्योंकि उस दिन उसने कुछ ज़्यादा ही बोल दिया था. वो जाते हुए बोला कि इस थप्पड़ की मुझे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी.
मैंने यह बात अपने घर में किसी से भी नहीं कही. कुछ दिनों बाद उस लड़के ने मुझसे अपनी शादी के लिए अपने माँ बाप को मना लिया. क्योंकि वो हमारी ही बिरादरी का था, इसलिए किसी को भी कोई ऐतराज़ नहीं हुआ. मैं इस शादी से खुश नहीं थी. मगर मुझसे कुछ भी ना पूछा गया, क्योंकि मैं उन सबकी नज़रों में एक वस्तु जैसी थी, जो उन पर भार बनी हुई थी. इसलिए उनका सोच था कि इससे छुटकारा पाना ही अच्छा है. फिर उनको मेरे लिए कोई लड़का ढूँढना की मेहनत भी नहीं करनी पड़ी और इस तरह से मेरी शादी हो गई.
शादी के बाद हर लड़की कुछ सपने संजोए होती है कि उसके साथ उसका पति किस तरह से उससे अपने प्यार का इज़हार करेगा. उससे किस तरह से अपने संबंध बनाएगा.
खैर… आधी रात को वो मेरे कमरे में आया और बोला कि आज बदले का दिन आ गया है… तुम तैयार हो जाओ, जो थप्पड़ मारा था… उसका बदला आज चुकाना होगा.
मैंने कहा- अब मैं आपकी पत्नी हूँ ना कि कोई अंजान लड़की. मेरी इज़्ज़त का ख़याल रखना, अब आप का काम है.
उसने कहा- उसी काम की ही तो तैयारी करने लगा हूँ.
उसने मुझे नंगी करके पहले तो मेरे मम्मों पर थप्पड़ मार मार कर दबाना शुरू किया. जब मेरे मम्मे थप्पड़ों की मार से से लाल हो गए तो वो ज़ोर जोर से दबा दबा कर चूसने लगा और दांतों से काटने भी लगा. मैं चिल्ला रही थी. घर के बाहर भी आवाज जा रही थी और घर वाले समझ रहे थे कि लड़की को लड़का चोद रहा होगा और लड़की की चूत में मुश्किल से लंड जा रहा होगा, इसलिए चिल्ला रही है.
उसके बाद उसने अपना मूसल लंड मेरी चूत में डाल कर मुझे बुरी तरह से चोदा. सुबह जब मैं कमरे से बाहर निकली तो मेरी छाती बुरी तरह से दर्द से भरी थी. उसके घर में रिश्ते की आई हुई जवान लड़कियां और बहुएं कहने लगीं- लल्ली, यह सब तो होता ही है. लल्ला ने तेरे मम्मों को तो दबाना ही था और अपना लंड भी तेरी चूत में डालना था. इसलिए यह सब तो अब रोज़ रोज़ होगा.
मैं किसी से कुछ भी ना कह पाई क्योंकि मैं सच बोलने लायक नहीं थी.
अगले दिन घर पर यह बोल कर वो मुझे ले गया कि हम लोग हनीमून मनाने जा रहे हैं और कुछ दिनों बाद आएंगे.
शाम को मुझे ले जाकर वो एक होटल में ले आया. जब खाना खा लिया तो मुझे कमरे में लेकर आ गया. वहाँ उसके तीन दोस्त पहले से ही बैठे थे. मैं उन्हें देख कर पहले तो घबरा गई मगर फिर सोचा जब पति साथ है, तो फिर किस बात का डर.
रूम में उन्होंने शराब पीनी शुरू कर दी. जब उन्होंने दो दो तीन तीन पैग पी लिए तो एक दोस्त बोला- यार भाबी को क्यों भूल गए… उसभी तो यह अमृत पिलाओ.
फिर क्या था, मेरा पति ने पूरी बोतल ले कर मेरे मुँह में लगा कर बोला- लो पियो इसे.
मैंने कहा- नहीं… मैं नहीं पी सकती.
इसके बाद जो कुछ हुआ, मैं यहाँ नहीं लिख सकती क्योंकि वो नियम विरूद्ध होगा.
अगले दिन सुबह ही वो मुझे घर पर वापिस ले आया और बोला- संभालो अपनी इस लाड़ली बहू को, मुझे नहीं रहना इस रंडी के साथ. अगर आपको यकीन ना हो तो यह सीडी देख लो, जो इसने रात को किया है. मैं इससे बोल कर गया था कि 2-3 घंटों में वापिस आता हूँ… मगर इसने अपने यार बुला रखे थे वहाँ पर. उन्होंने ही मुझसे धमकी देकर कहा था कि अगर जान सलामत चाहते हो तो सुबह आकर बीवी को ले जाना. सुबह उन्होंने मुझे यह सीडी देकर कहा कि अगर इसे रखना हो तो रख लो, वरना हम इसे संभाल लेंगे. मैं तो इसके साथ रह नहीं सकता, आप जो चाहो करो.
मेरी सास सबसे ज़्यादा उछल उछल कर मेरे लिए जो ना कहना था, वो भी कह रही थी.
इसके बाद मेरे सारे कपड़े और जेवर मेरे साथ रख कर मुझे वापिस माँ बाप के घर भेज दिया और साथ में कहा कि देख लो अपनी बेटी की करतूत.
मैंने सब को सच सच बताया मगर किसी ने भी मेरी बात नहीं सुनी. मुझे घर से बाहर कर दिया. मैंने तब कहा कि ठीक है, मैं इस रात को कहीं नहीं जा सकती मगर कल सुबह ज़रूर चली जाऊंगी.
मैंने रात को अपने पति को फोन किया कि जो तुम ने करना था, सो कर लिया. अब मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगी. मुझे तुमने एक रंडी बना दिया है, अब देखना मैं तुम्हारे घर की सभी औरतों को कैसे रंडी बनाती हूँ.
इस पर उसका जवाब था कि तुम अपने को संभालो… मेरी छोड़ो.
मैंने यह कहते हुए फोन बंद कर दिया कि ठीक है… मगर याद रखना जो मैंने कहा है.
अब मुझे सोचना था कि आगे क्या करूँगी. फिलहाल मुझे कोई रास्ता नहीं नज़र आ रहा था. मैं रात को सोचती रही कि अब क्या करूँ.
फिर मैंने अपने साथ कॉलेज में पढ़ने वाली एक लड़की को फोन किया, जो बहुत बदनाम थी. उसके बारे में ये चर्चा सुनती थी कि यह रात रात भर अपने यारों के साथ होटलों में जाती है.
फोन पर उसने मुझसे कहा- मैं तुम को पहचान नहीं पाई. खैर तुम कल मेरे ऑफिस में आ जाना, वहीं पर बात करते हैं.
उसका नाम तबस्सुम था.
मैं ऑफिस के टाइम से पहले वहाँ पहुँच कर उसका इंतज़ार करने लगी.
मुझे देखते ही वो बोली- तुम पूनम ही हो ना?
मैंने कहा- हाँ अच्छा हुआ जल्दी ही पहचान लिया. कल फोन पर तो तुम पहचान ही नहीं पाई.
वो बोली- आओ बैठ कर बातें करते हैं. वो मुझे अपने केबिन में ले गई और बोली- बैठो… मैं अभी आती हूँ.
वो दस मिनट बाद आई, उस समय उसकी लिपस्टिक होंठों से ऐसे हो चुकी थी कि किसी ने उसको बुरी तरह से चूमा चाटा है. वो शीशा के सामने जा कर उसको ठीक करने के बाद मुझ से बोली- हां अब बताओ… साथ ही बोली- यार प्राइवेट ऑफिस है ना… यहाँ बॉस को खुश रखना पड़ता है.
मैंने उससे अपनी प्रॉब्लम बता कर कहा- मुझे तुमसे दो तरह की सहायता चाहिए. एक तो मुझे कोई रूम किराए पर ढूँढने के लिए सहायता और दूसरी नौकरी ढूँढने की.
वो बोली- पहेली तो समझो हो गई… तुम मेरे घर पर रहो क्योंकि मैं अकेली ही रहती हूँ… और दूसरी के बारे में रात तो घर पर बात करते हैं.
इसके बाद उसने किसी को बुलाया और बोला कि मेमसाहब को मेरे घर पर छोड़ कर आओ और साथ ही घर की चाबियां उसे दे दीं.
घर जाकर मुझे नींद आ गई क्योंकि चिंता के मारे मुझे पूरी रात नींद ही नहीं आई थी. कोई एक बजे मेरी नींद उखड़ी, तब उसका फोन बज रहा था. मैंने जब उठाया तो वो बोल रही थी- क्या हुआ… मैं बहुत देर से तुमसे बात करना चाह रही थी, तुम फोन को उठा ही नहीं रही हो… क्या हुआ?
मैंने उसे सब बताया.
उसने कहा- चिंता ना करो और देखो मैं रात को दस बजे के बाद ही घर वापिस आऊंगी, तब तक तुमको भूख लगे तो फ़्रिज़ से कुछ निकाल कर खा लेना, खाने के लिए मेरा इंतज़ार ना करना क्योंकि मैं खा कर ही आऊंगी. और हाँ देखो… अगर बोर होने लगो तो मेरे पीसी के टेबल की लेफ्ट ड्रॉवर से फिल्म निकाल कर देख लेना.
मैंने वही किया मगर फिल्म में कोई मज़ा नहीं आया.
फिर मैंने दाएँ तरफ वाली ड्रॉज खोली तो उसमें भी बहुत सी सीडी पड़ी थीं. मैंने उनमें से एक निकाल कर लगा दी. जैसे ही वो शुरू हुई तो कंप्यूटर पर लंड और चूत के खेल शुरू हो गए. मैं मज़े से देखने लग गई. फिर क्या एक के बाद एक देखने लगी, वहाँ सभी चुदाई की पिक्चर्स थीं.
रात तो दस बजे तक मैं यही देखती रही और खाना भी भूल गई. तब मुझे याद आया कि वो वापिस आने वाली होगी. क्योंकि उसने मुझे इन पिक्चर्स के बारे में नहीं बताया था, तो मुझे यही दिखलाना था कि मुझे कुछ नहीं पता.
वो साढ़े दस बजे आई. उसके मुँह से शराब की गंध आ रही थी, मगर वो पूरे ही होश में थी. उसे देख कर कोई कह नहीं सकता कि वो शराब पी कर आई है. खैर उसने आते ही पूछा कि खाना खा लिया?
मैंने कहा- नहीं मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी.
उसने कहा कि उसने तो बता दिया था कि वो खा कर आएगी.
खैर उसने डबलरोटी और अंडे निकाल कर ऑमलेट बना कर मुझे दिया और बोली- अभी तो यह खाओ… सुबह कुछ और व्यवस्था करती हूँ.
फिर वो चेंज करके आई तो मैंने उसे देखा कि वो एक नाइटी में थी, जो ऑलमोस्ट ट्रांसपेरेंट थी और उसमें से उसका सब कुछ नज़र आ रहा था.
वो मुझसे बोली- यार तुम भी चेंज कर लो.
मेरे पास मोटे कपड़े थे, जब मैंने उनको डालना शुरू किया तो बोली- क्या यार, तुम भी कहाँ की दकियानूसी हो. मेरे जैसे कपड़े डाला करो और अब तुम पूरी मॉडर्न बन जाओ.
फिर उसने अपनी तरह की एक नाइटी मुझे दी और मैंने उसे डाल लिया, मगर डालते ही मुझे उसके सामने जाने में भी शरम आ रही थी.
उसने देखा और बोली- अब शरम नाम की चिड़िया को जहाँ से आई हो.. वहीं छोड़ दो. मेरे साथ मेरी तरह से रहा करो. जिन कपड़ों को मैंने डाला था, उसमें से मेरे मम्मों की घुंडियां और चूत के बाल भी नज़र आ रहे थे.
वो मुझे देख कर बोली- कल ये चुत की झांटें साफ कर लेना और हाँ कोई ब्लेड ना इस्तेमाल करना, इस काम के लिए गुसलखाने में क्रीम रखी हुई है, उसी को इस्तेमाल करना. उसे लगा कर दस मिनट रखना और फिर सब साफ हो जायेंगे. यह बाल चूत पर घूँघट बन कर उन्हें अपनी शकल देखने से रोकते हैं.
मैं चुप रही.
फिर वो बोली- देखो यार, नौकरी तो मिल जाएगी मगर तुम्हें अपना जलवा भी दिखाना पड़ेगा.
मैंने कहा- मैं मतलब नहीं समझी?
उसने कहा- तुमने देखा नहीं था सुबह मेरे होंठों का क्या हुआ था. वो सब मेरे बॉस ने किया था मगर क्योंकि नौकरी करनी है तो सब कुछ सहना पड़ता है. एक बात समझ लो, जो काम हमें दिया जाता है, उसके लिए तो वो लोग किसी से पांच हजार देकर भी करवा सकते हैं. जबकि इसी काम के लिए हमें 25000 से 30000 तक देते हैं, तो इनको वसूलेंगे भी ना.. और यह सब वसूला जाता है हमारे मम्मों से और चूत से.
उसने फिर मुझे समझाया कि देख यह दो मम्मे हमारे खजाने की चाबियाँ हैं और खजाना चूत है. चाबियों से दबा दबा कर खजाने का रास्ता निकलता है और जितनी जल्दी यह समझ जाओगी, तेरे लिए उतना ही अच्छा रहेगा.. और एक बात याद रखो कि लड़की सिर्फ़ एक चूत होती है, उसका काम हैं लंड को अपनी चूत में ले कर स्वागत करना. तुम खुद ही देख लो, तुम्हारे साथ लंडों ने क्या किया. सिवाए अपने अपने लंड को तुम्हारी चूत में डाल कर रगड़ा और चलते बने.
मैं उसकी बातों का मर्म समझ रही थी.
उसके बाद वो बोली- अभी पूनम तुमने चूत की असली जिंदगी नहीं देखी. उसके साथ क्या क्या किया जाता है. मैं तुम्हें बताती हूँ. यह लड़के 5-6 लड़कियाँ ले कर आते हैं और किसी ग्राहक, जो उन्हें चोदना चाहते हैं, उसके पास ले जाते हैं. फिर उन लड़कियो को नंगी करके उनकी नुमायश कराई जाती है. वो ग्राहक लड़कियों के मम्मों को बुरी तरह से दबा दबा कर देखता है कि यह कितने ढीले हुए हैं.. या अभी सख्त हैं. फिर उनकी नोकों को खींच खींच कर मींजता है. इस पर भी जब उसका दिल नहीं भरता, तब चूत को अपने हाथों से पूरी तरह से खोल कर देखता है. तब जा कर किसी को पसंद करके चोदने के लिए लेकर जाता है. मैं यह सब खुद देख सुन और भुगत चुकी हूँ.
मैं बस उसकी तरफ मूक दर्शक सी सुनती रही.
वो बोले जा रही थी- मगर जब यह चूत अपनी पर आ जाती है तो बड़े बड़े लंडों को पानी पिला देती है. परंतु इसके लिए बहुत कुछ करना पड़ता है.
उसने मुझे यह सब समझा कर कहा- अब तुम मेरे साथ रहती हो.. न कि अपने उन लोगों के साथ, जिन्होंने बिना सोचे तुम्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. अब तुम कुछ ऐसा काम करो कि उन सबको पानी पिला दो.
मैंने पूछा- क्या यह हो सकता है?
वो बोली- क्यों नहीं हो सकता, अगर कोई चूत अपनी पर आ जाए तो क्या नहीं कर सकती.
मैंने उससे कहा- मैं वो सब कुछ करूँगी, जिससे मेरे पति की बहन और माँ को चुदवा कर उनकी फिल्म बना लूँ.
वो बोली- उसके लिए बहुत कुछ करना पड़ेगा.. मगर हो जाएगा. उनसे बदला लेने के लिए मैं तुम्हारा साथ दूँगी.
मैं खुश हो गई थी.
उसने कहा- ठीक है, मैं तुम्हें कल शाम को अपने साथ ले कर चलूंगी और तुम को कुछ ऐसे लोगों से मिलवा दूँगी, जो यह सब कर पाएंगे.
अगले दिन उसने मुझे शाम के 4 बजे कहा कि ठीक 5.30 पर होटल मेट्रो के बाहर मिलना.. और हां ज़रा सेक्सी ड्रेस डाल कर आना. अगर ऐसी ड्रेस ना हो, तो मेरे अलमारी से निकाल कर डाल लेना.
शाम को मैं पूरी तरह से बन ठन कर ठीक समय पर होटल मेट्रो के बाहर खड़ी थी. तबस्सुम किसी के साथ आई और उसने मुझे इशारा किया कि मेरे पीछे आ जाओ.
मैं उसके पीछे पीछे चल पड़ी और जब वो दोनों होटल के किसी कमरे में जाने लगे तो मुझसे बोले कि तुम भी आ जाओ.
वहाँ पहले से ही 4-5 लड़के बैठे थे और हरेक किसी ना किसी लड़की के साथ था. बस मैं ही थी, जो किसी लड़के के साथ नहीं थी.
अब मैं वहाँ ताश के पत्तों का पपलू थी. सब लड़के मुझे देख कर अपने अपने लंड मसलने लग गए.
तबस्सुम ने उनको देख कर कहा- नहीं, यह आज हमारी मेहमान है और सिर्फ़ हम सबको देखेगी और फिर यह किसी खास आदमी की अमानत है. जब तक वो इसका भोग ना लगा ले, तब तक इसे कोई छू भी नहीं सकता.
उसके बाद सब लड़कों और लड़कियों ने अपने अपने कपड़े निकाल कर ऐसे फैंक दिए, जैसे वो सब फालतू हों.
अब कमरे में चुदाई का पूरा नंगा नाच होने लग गया. कभी कोई किसी को चूमता और मम्मे दबाता, कभी कोई किसी की चूत में उंगली करता. जो चाहे जिसकी चुत में चाहे जो करे, कोई किसी को कुछ नहीं बोल रहा था. सब पूरे मज़े ले रहे थे.
मेरे लिए यह सब एक नई दुनिया थी. रात को दस बजे वो सब एक दूसरे की चूत और लंड से खेल कर बाहर जाने लगे. मगर तबस्सुम वहीं पर रुकी रही और उसने मुझको भी रोक कर रखा.
उसने मुझसे बोला- अभी तक तो तुमने हम लोगों की चुदाई देखी है. अब तुम भी तैयार हो जाओ. तुम्हारा लौड़ा भी आने वाला है. उससे मस्त हो कर चुदवाना. वो तुम्हारा काम पूरे अंज़ाम तक पहुँचाएगा. मतलब कि तुम्हारे पति की माँ और बहन की बजवाएगा. मगर अभी उससे कुछ ना कहना, बस उसे खुश करना. उसको खुश कैसे करना है, वो तुम देख चुकी हो.
यह कह कर वो मेरा जवाब सुनना चाहती थी.
मैंने कहा- अपने अंजाम तक पहुँचने के लिए अगर कोई मुझे बाज़ार में भी नंगी हो कर नचवाएगा, तो भी मैं तैयार हूँ.
इतने में एक आदमी जो 40-45 साल का था, कमरे में आया और मुझको देखने लगा.
तबस्सुम ने कहा- बॉस, इसी के बारे में मैंने कहा था. यह आज आपकी गोद में बैठ कर आपकी पूरी रात रंगीन करेगी.
उसने तबस्सुम के मम्मों को दबा कर कहा- ठीक है.. इसे सब कुछ पता है ना.
तबस्सुम ने कहा- जी हजूर.
“ओके फिर तुम जाओ.”
वो मुझे आँख मार कर बाहर चली गई. अब कमरे में मैं और वो ही थे. उसने कहा- अपने कपड़े उतारो.
मैंने झट से उतार दिए.
अब मेरी पूरी साफ चुत और गोल गोल मम्मे और उनके ऊपर लगी गुलाबी घुंडियां उसको चिढ़ा और ललचा रही थीं.
उसने कहा- मुझे भी नंगा करो.
मैं उसके एक एक करके कपड़े उतारने में लग गई. जो ब्लू फ़िल्म मैंने तबस्सुम के घर पर कल देखी थी, उनसे ज्ञान ले कर सब कुछ कर रही थी.
जैसे ही मैंने उसकी चड्डी उतारी, उसका लंड आसमान को छूने लगा.
मैंने लंड देखते ही उसके कहने से पहले ही उसका लंड अपने मुँह में ले लिया. वो मेरे मुँह को चूत की तरह से चोदने लगा.. और तब तक चोदता रहा, जब तक उसका पानी मेरे मुँह में नहीं निकल गया.
वो लंड चुसाई से बहुत खुश हुआ और बोला कि तुम तो बहुत कमाल की चीज़ निकली.. मैं नहीं समझता था कि तबस्सुम कोई ऐसा माल भी अपने साथ रखती है.
अब उसकी बारी थी मेरी चूत को चाटने की, तो इस काम में वो बहुत ही माहिर था. उसने चूत को बड़े प्यार से चाटा, पहले तो बाहर से.. फिर चुत को खोला और अपनी उंगली की, मगर ध्यान उसका मेरी चूत के मटर पर था. उसको मुँह में ले कर बाहर की तरह खींचने लगा.
जब उसने मेरी चुत को पूरा लाल कर दिया, तब उसने अपनी ज़ुबान मेरी चूत में हिलानी शुरू कर दी. उस समय मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया, जो उसने चाट कर पी लिया.
फिर वो मुझसे बोला- आज तुम मेरी चुदाई करो.
मैं समझ गई कि वो मुझे अपने लंड पर बैठाना चाहता है.
यह सब मैं कल ही तबस्सुम के घर पर किसी फिल्म में देख चुकी थी कि किस तरह से लंड पर बैठा जाता है.
बस मैंने पूरी उसकी कॉपी करनी शुरू कर दी. अब तो वो पूरे सातवें आसमान पर था और उसने झट से तबस्सुम को फोन किया कि वो आज उसका पूरा कर्ज़दार हो गया. क्योंकि उसने आज बहुत दिनों बाद कोई असली चूत दिलवाई है.
मुझे नहीं पता कि तबस्सुम ने उससे क्या कहा, मगर उसका उत्तर था- हां हां बिल्कुल जितना हो सकेगा, पक्का करूँगा.
फिर उसने मुझसे कहा- क्या तुम किसी से बदला लेना चाहती हो?
मैंने कहा- साहब आज चुदाई में इन बातों को करना ठीक नहीं… वरना मज़ा भी गायब हो जाएगा. मैं फ़ुरसत में आपको सब बताऊंगी.
यह सुन कर वो और भी खुश हो गया. वो बोला- तुम सच में चुदाई की क्वीन (रानी) हो या कहूँ कि बेगम हो.. मैं तुम्हारा गुलाम बन चुका हूँ.
इस तरह से पूरी रात उससे अपनी चूत को चुदवाती रही और उसे पूरा खुश करती रही.
अगले दिन जब मैं घर वापिस आई तो तबस्सुम ऑफिस जाने को तैयार थी. वो बोली- आराम करो और नाइट शिफ्ट की तैयारी करके रखना. वो आज भी तुम्हें अपनी गोद में लेकर सोएगा.
मैंने कहा- मुझे लग रहा था कि यही होगा.
वो- ओह ओह बहुत जल्दी समझदार बन गई हो. आज कम से कम आधा घंटा अपने मम्मों की मालिश करना और हाथों को नीचे से ऊपर ले जाना और कभी भूल कर बिना ऊपर से नीचे ना लाना. इससे मम्मे हमेशा खड़े रहेंगे और लटकेंगे नहीं. अगर लटक गए तो समझ लेना कि सत्यानाश हो गया.
मैंने कहा- ठीक है.
उसके जाने के बाद मैंने पूरा एक घंटा मम्मों की मालिश की और मम्मों की नसों को नीचे से ऊपर ले जाती थी ताकि वो उठे रहें.
फिर चुत पर भी ध्यान देना शुरू किया. मैं लेट कर साँस लेती थी और हर सांस के साथ चूत को अन्दर की तरह करती थी, जिससे कि वो सिकुड़ जाए.
यह सब करने के बाद मैं नहाने चली गई और साबुन से अच्छी तरह से चूत की सफाई की, जिससे जब यह चुदाई करने वाले के सामने आए तो वो भी दिल भर करके इसे देख कर प्यार करे.
शाम को तबस्सुम का फोन आया कि तुम आज सेक्टर 7 में चली जाना और मैं बस स्टॉप पर तुम्हें लेने के लिए गाड़ी नम्बर 7819 आएगी. वो तुम्हें अपनी मंज़िल तक ले जाएगी.
मैं निश्चित टाइम पर पहुँच गई और जैसे ही गाड़ी आई तो उसमें वो ही आदमी बैठा था, जिसने कल मेरी चुदाई की थी.
मैं गाड़ी में बैठ गई और बैठते ही उसने मेरा मुँह अपने लंड पर रखवा दिया, जो पहले से ही पैन्ट से बाहर निकला हुआ था और पूरी तरह से खड़ा हुआ था. मैंने उसके लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और बड़ी मस्ती से चूसा, जिससे वो कुछ देर बाद ही झड़ गया. मैंने उसके लंड का सारा माल अपने गले के नीचे कर लिया.
अब वो मुझे अपनी गोदी में बिठा कर मेरे मम्मों को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा. मैंने उससे कहा- ज़रा आराम से कीजिएगा, मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ. अब आई हूँ तो पूरी तसल्ली करवा के ही जाऊंगी.
लेकिन वो कहाँ मानने वाला था, उसे तो मेरे मम्मे इस तरह से लग रहे थे जैसे किसी बच्चे को उसका मनपसंद खिलौना मिल गया हो और वो उसे छोड़ना ही ना चाह रहा हो.

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