भान्जे के साथ प्यास बुझाई

मेरी प्यारी कुँवारी बहनों, मेरा नाम जुबैदा है। आप लोगों ने यौवन के दहलीज पर कदम रखते ही ज़िंदगी के हसीन अनुभवों के बारे में रंगीन सपने देखना शुरू कर दिए होंगे। ऐसे सपने मैंने भी देखे थे.. जब मैं 18 साल की हो गई थी।
मेरा जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ है.. मेरे पिताजी किसी सरकारी कंपनी के दफ़्तर में छोटी सी पोस्ट पर काम करते थे। मेरी माँ एक अच्छे घर से थीं.. लेकिन संप्रदाय और परंपरा के अनुसार पति के घर को अपना संसार और पति की सेवा अपना धरम मानते हुए जीवन जी रही थीं।
पिताजी के तीन और भाई थे.. सब अच्छी पढ़ाई और तरक्की की वजह से अच्छे दिन देख रहे थे। पिताजी पढ़ाई में उतने होशियार और तेज नहीं थे.. ऊपर से बचपन से ही उनमें आत्मविश्वास और खुद्दारी की कमी थी.. धीरज और कर्मठता कम थी।
उनकी एक ही खूबी यदि कोई थी.. तो वो कि उनके पिताजी का समाज में बड़ा आदर था। बस खानदान के नाम पर मेरी माँ की शादी उनसें कर दी गई थी।
माँ कभी कुछ माँगने वालों में से नहीं थीं.. जो मिला उसी से संतुष्ट थीं, वो बहुत खूबसूरत भी थीं, उनकी खूबसूरती की वजह से पिताजी का आत्म-सम्मान और भी कम हो गया था।
पिताजी ने कभी भी ज़िंदगी में प्रयास नहीं किया.. उल्टा अपने जैसों की संगत में अपनी बदक़िस्मती की खुलकर चर्चा करते रहते थे। ऐसी संगत में उनकी मुलाकात एक नौजवान से हुई.. जो उनके जैसे ही था।
आप तो जानते ही हैं कि जब अपने जैसे मिल जाते हैं.. तो दोस्ती बढ़ जाती है।
पिताजी उस नौजवान को अपना खास दोस्त मानने लगे और दिन-रात दोनों अपनी छोटी ज़िंदगी की तकलीफें एक-दूसरे के साथ बाँटते रहते। वो नौजवान भी पिताजी के दफ़्तर में काम कर रहा था। उनकी दोस्ती एक दिन ऐसे मोड़ पर आ गई कि पिताजी ने उसे अपना दामाद बनाने का निश्चय कर लिया।
मेरी दो बड़ी बहनें थीं.. दोनों की शादी हो गई थी। हम तीनों एक-दूसरे के काफ़ी करीब थीं.. दोनों बहनें अपनी सुहागरात और गृहस्थ जीवन के रंगीन अनुभवों के रहस्य मेरे साथ बाँटती थीं।
मैं उस लड़के के बारे में नहीं जानती थी। शादी तुरत-फुरत पक्की हो गई। माँ भी थोड़े ही मना करने वाली थीं.. ऊपर से उसकी सरकारी नौकरी थी.. उस लड़के के अन्दर की बातें किसको पता.. कि वो अन्दर से कैसा है। लड़का भी तैयार था.. मैं भोली-भाली सी थी… मगर माँ पर गई थी.. इसलिए मैं भी काफ़ी खूबसूरत थी।
मैं मैट्रिक तक ही पढ़ी थी.. लेकिन सजने-संवरने में पूरी पक्की थी.. ज़ाहिर है.. यही सब देख कर साहब तुरंत राज़ी हो गए..
अपनी बहनों के क़िस्सों से प्रेरित होकर मैं भी उसी तरह के सुनहरे सपने देखा करती थी.. जो आप लोग शायद अभी देख रहे हैं।
लड़कों के बारे में तो मैं 15वें साल से ही सोचने लगी थी.. 18 साल की उम्र में मेरी ख्याल चुदाई के बारे में होने लगे थे.. कि मेरी सुहागरात कैसे कटेगी.. पति की बाँहों में कैसे सुख प्राप्त होगा.. संभोग और काम कला के आसान किस तरह के होंगे.. रति सुख कैसा होगा.. मर्द का कामांग कैसा होगा.. आदि इत्यादि।
ऐसे रंगीन ख़याल मेरी जवानी की गर्मी को और हवा देने लगे।
सहेलियों की संगत में कुछ ऐसी शारीरिक हरकतों के बारे में ज्ञान प्राप्त हुआ.. जिससे रति सुख स्वयं अनुभव करने का मौका मिला। हस्तमैथुन प्रयोग में मज़ा तब आने लगा.. जब तन की गर्मी बढ़ने लगी।
उन हसीन रसीली काम-शास्त्र की किताबों और पत्रिकाओं से.. जिनमें आदमी-औरत के बीच की रसभरी चुदाई कथा का खुलकर वर्णन हुआ था.. इन किताबों की बदौलत मुझे पूरा सेक्स ज्ञान प्राप्त हुआ और मैं अच्छी तरह से समझ गई कि एकांत में एक मनचाहा मर्द के साथ क्या करना चाहिए।
शादी के कई वर्ष बीत गए और मुझे अपने पति से वो सुख नहीं मिल सका जिसका मुझे कुछ ज्यादा ही इन्तजार था।
इस नीरस जीवन को भोगते हुए पूरे 12 साल गुजर चुके थे।
अब मैं एक 32 साल की उम्र औरत हो गई थी.. जिसके लिए एक नया जन्म हुआ.. शादीशुदा औरतें जब बच्चे पैदा करती हैं तो उनकी परवारिश में 10 साल काट लेती हैं। जब बच्चे कुछ बड़े हो जाते और माँ की ममता और सहारे से मुक्ति पाकर पढ़ाई और खेल कूद की ओर ध्यान बढ़ाते तो औरत का मन निश्चिन्त हो जाता और पति के प्यार के लिए दोबारा तरसने लगता। शादी के तुरंत बाद लड़कियाँ शरम और लाज के साथ पति से मिलन करती और सेक्स की दुनिया में पहला कदम रखती। तब उनकी आलोचना और अनुभव बहुत नादान सा होता है।
अब तक 12 साल गुज़र गए थे। एक पूरा वनवास समझ लीजिए.. पति सिर्फ़ रोटी कपड़ा और मकान की गारंटी बन गया था।
टीवी.. वीडियो.. मैगज़ीन.. सिनेमा.. बुनाई.. सिलाई.. इत्यादि के सहारे मैंने इतने साल सुखी जीवन बिताया.. बच्चे ना होने का मेरे पति पर कोई असर नहीं डाला। वो जानता था कि दोष उसी में है। बाहर लोग क्या सोच रहे थे क्या मालूम? कुछ सहेलियों को मैंने यूँ ही बताया कि हम दोनों में किसी को भी कोई कमज़ोरी नहीं थी और हर कोशिश के बावजूद बच्चा नहीं हुआ।
मैंने अपनी इच्छाओं को दबा कर रखा। मुझे जब भी जिस्म की भूख ने परेशान किया तो मैं हाथों से ही इस भूख का निवारण कर लेती थी।
हस्तमैथुन प्रयोग मेरे लिए क्रिया कम.. दवाई ज़्यादा बन गई थी। मैं अभी भी जवान 32 साल की एक मस्त औरत हूँ.. लेकिन मेरी जीवन गाथा एक 50 साल की औरत सी हो गई थी।
एक दिन पति ने बताया कि उनकी बहन का बेटा हमारे यहाँ आ रहा है।
उसने मैट्रिक खत्म कर लिया है और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए हमारे शहर के एक कॉलेज में दाखिला ले लिया है।
पति चाहते थे कि उसे अपने घर में ही रख कर उसे पढ़ाई में मदद दें। उनका मानना था कि वो तो बदकिस्मत हैं लेकिन इस लड़के की कामयाबी में कोई कसर ना छोड़ी जाए और इसकी तरक्की में अपनी सफलता को साकार कर लिया जाए।
मैं क्या बोलती.. ऐसी हज़ार बातें सुन चुकी थी। इस लड़के के आने से मेरी घरेलू जिम्मेदारी थोड़ा और बढ़ जाती.. पर उससे ज़्यादा और कुछ नहीं होगा।
फिर इस लड़के का क्या दोष? बेचारा वो हमारे हालत से कैसा जुड़ा.. उसे तो पढ़ाई करनी है। मैंने मंज़ूरी दे दी और घर का एक बेडरूम उसे दे दिया.. ताकि वो वहाँ पढ़ाई कर सके।
करीब 30 साल के उम्र के बाद.. औरत अनुभवी और पक्के इरादे वाली हो जाती। सेक्स में दोबारा जब दिलचस्पी जागती तो शरम के बजाए कार्यशीलता से संभोग में भाग लेती और लाज को छोड़कर नए नई तरीकों से पति के साथ बिस्तर का खेल आज़माने की कोशिश करती है। पति भी अनुभवी हो जाता है और पत्नी को खूब मदद करता है। इस तरह 30 साल के उम्र के बाद पति-पत्नी सेक्स की ज़िंदगी में एक नई उमंग लेकर कूद पड़ते और सेक्स का भरपूर आनन्द लेते हैं।
मुझे बच्चे तो नहीं हुए थे और मैं 10 साल से ज़्यादा तड़फी थी। लगभग 32 साल की उम्र में मेरा मन भी इसी उम्र की बाकी औरतों की तरह सेक्सी हो गया.. और मुरादें पूरा ना होने के कारण कुछ ज़्यादा ही तड़प रहा था.. इसीलिए जो लाज और शर्म मुझे 12 साल पहले पाप करने से रोक चुकी थी.. आज उसी लाज और शर्म को मेरे मन ने बाहर फेंक दिया और इच्छाओं का दरवाज़ा खोल दिया।
पति की नाकामयाबी मेरे साथ एक धोखा सा था.. पति को धोखा देना कोई पाप नहीं लग रहा था।
अगर मेरे पति बिस्तर में कामयाब और नॉर्मल होते.. तो आज उनके साथ खुश रहती.. लेकिन उनकी बारह साल की नपुंसकता के सामने पराए मर्द के साथ सेक्स करने की सोचना पाप नहीं लग रहा था।
और तो और.. भान्जे के साथ सेक्स करने से इस पाप को घर के अन्दर तक सीमित रख सकती हूँ। किसी को कुछ पता नहीं लगेगा। वैसे भी मैं सिर्फ़ सेक्स चाहती हूँ.. रिश्ता नहीं..
इन सब बातों से मन और भी निश्चिंत हो गया और मैंने मन ही मन चंदर से संभोग करने का इरादा बना लिया।
अपने इस नई रूप से मैं खुद चंचल हो उठी। बिस्तर से उठकर मैं आईने के सामने खड़ी हुई और नाईटी निकाल कर अपने ही जिस्म की जाँच करने लग गई। मैं काफ़ी सेक्सी लग रही थी.. मेरी ही चाह मुझे होने लगी थी।
आप लोगों को बता दूँ कि अब मेरे मम्मे बहुत ही बड़े थे, ब्रा 36 सी की साइज़ की पहनती हूँ। उनको जितना भी ब्लाउज.. ब्रा और साड़ी के पल्लू के सहारे ढक दूँ। उनकी गोलाई और उभार को छिपा नहीं सकती। जो भी मुझे देखता, मेरी वक्ष-संपदा से तुरंत परिचित हो जाता।
उम्र के लिहाज़ से मेरे नितंब भी काफ़ी उभर आए थे और कमर चौड़ी और जाँघ भारी और मांसल लग रही थी।
जिस्म का रंग काफ़ी गोरा था.. माँ की देन थी.. मैं सच में बड़ी सेक्सी लगती हूँ।
उन दिनों मायके में मोहल्ले के बहुत सारे लड़के मेरे दीवाने थे। आख़िर चंदर से मेरे जिस्म का करारापन कैसे छिपता.. उसने जरूर मेरे मदमस्त यौवन पर गौर किया होगा.. शायद मेरी नग्नावस्था को भी अपने कामुक मन में बसा कर हस्तप्रयोग भी करता होगा।
चंदर को पटाने के लिए यह सेक्सी जिस्म ही काफ़ी है।
अगले दिन.. पति ऑफिस जा चुके थे और भांजा कॉलेज निकल गया था। सब काम से निपट कर में सोफे पर बैठी टीवी देख रही थी कि अचानक मुझे रात के किस्से का खयाल आया। मैं उठकर भान्जे के कमरे में गई और छानबीन की.. पर उसकी अलमारी से कुछ नहीं मिला.. बिस्तर के नीचे कुछ नहीं था।
लेकिन गद्दे के नीचे कुछ किताबें मिलीं.. साथ में कन्डोम के कुछ पैकेट भी मिले।
मेरा सर चकराने लगा.. कई ख्याल एक साथ आने लगे.. मेरा दिल धड़क रहा था और ऐसा लग रहा था कि मैं कोई जासूस की तरह किसी दुश्मन के घर में छानबीन कर रही हूँ और कभी भी पकड़ी जा सकती हूँ।
लेकिन मैं भी घर में अकेली थी.. मेरे हाथ में सेक्स की किताबें थीं और मर्दों वाले कन्डोम भी थे।
मेरा मन चंचल हो उठा.. उसी बिस्तर पर लेट कर मैंने कन्डोम के एक पैकेट को खोलकर अन्दर का माल बाहर निकाला।
पहली बार मैं एक कन्डोम को हाथ में ले रही थी.. इससे पहले कभी करीब से देखा ही नहीं था। यह बड़ा अजीब सा लग रहा था.. एक छोटी सी टोपी की तरह.. पैकेट पर लिखे निर्देशों को पढ़ा और तुरंत ही मेरे चंचल मन में एक ख़याल आया।
मैं अपने कमरे में जाकर उसी मोमबत्ती को ले आई.. जिससे रात में मैंने अपने आपको शांत किया था।
मोमबत्ती मर्द के कामांग की तरह ही थी, कन्डोम के पैकेट के निर्देशों को दोबारा पढ़कर कन्डोम को मोमबत्ती पर चढ़ा दिया और देखने लगी।
मोमबत्ती के ऊपर की तरफ कन्डोम में एक छोटा सा गुब्बारा की तरह कुछ था, शायद यहीं वीर्य जमा होता है।
इस सबको करने और देखने से मुझे काफ़ी उत्तेजना हुई। कैंडल को बगल में रखा और किताबों के पन्ने पलटने लगी।
तीनों पतली किताबें थीं.. एक में सेक्स करने के आसनों में लिए गए विदेशी प्रेमियों के सेक्सी नंगे चित्र थे और उनकी हरकतों का संक्षिप्त वर्णन भी लिखा था। ऐसा लग रहा था.. जैसे बहुत सारे फोटो के सहारे कहानी दर्शाई जा रही हो।
शुरू से अंत तक एक दफ़्तर के बड़े बाबू और उसकी सेक्रेटरी के बीच की शर्मनाक संभोग कला का गहरा और ख़ास वर्णन हो रहा था। सेक्रेटरी अपने बॉस की गर्मी बढ़ाने के लिए कैसे-कैसे कामुक प्रसंग कर रही थी और बॉस भी उत्तेजित अवस्था में आकर सेक्रेटरी से अपनी दिल की बात और मिल रहे सुख का खुलासे का वर्णन कैसे कर रहा था.. यही सब लिखा था।
पूरा वर्णन हिन्दी में था और ऐसे-ऐसे शब्दों का प्रयोग हुआ.. जो काफ़ी अश्लील और लैंगिक थे।
लड़की बॉस के मोटे तगड़े लण्ड की प्रशंसा काफ़ी अश्लील और रंगीन शब्दों में कर रही थी और उसके साथ क्या कराना चाहती है.. इसका भी खुल्लम-खुल्ला वर्णन कर रही थी।

यह कहानी भी पड़े  सेक्स स्पेशलिस्ट डॉक्टर के साथ मजे

Pages: 1 2 3 4

error: Content is protected !!

Online porn video at mobile phone


भौजाई किवाड़ बंद नंगा चूतसमधी से चुदवायाhttps://buyprednisone.ru/maried-aunty-ki-antarvasna-sex/Jawan ladki ki chudaipapa NE mere chuche dabaye Hindi sex khaniya माँ को चोदा समुंदर मेMummy ki saheli ki chudai ki kahaniyaमूसल लड दीदी कूतियाwww sexhindi chutlund comछोटी बेहन को चुदाई सीखाई कहानीbhabhi ko gundo ne choda sex storiesप्यारी बहू अंजू मस्ती की कहानीतेरी बीवी की ब्रा उतार रहा हूंमाँ गांड फैलाते बेटाSex stories. Behan ka giftपत्नी की बुर मुँह में लंड चुदाईभाभी ने कहा खूब चोदो मेरे देवर राजा सेक्स स्टोरीकुँवारी चूत बुरी तरहMummy toilat m porn movie dekhti hindi chut chudai kahanidud pilai antarvasnasexkhaniya hindi rishto mainHindi.sexi.kahaani.maa.bhu.papa.beta.shathलहान बहिणीची छोटी पुच्चीKulfi ki jagah lund chusayaचोदा चोदी फोटो बहन के कमरे में घुस के चोदने का पोर्न वीडियोmaa ki kahanibeta se x videoXXX SHCHI TAUR VIDEO COM भाभी को बीसतार पर लेटा कार देवर ने मारी गाडसपना का बदला 2 sxsi khaniyaपड़ोसन छूट की स्टोरीभैया मेरी चुत फट गई कहानी Jism ki aag man n dil ka kya kasoor sex storieshindisax कहानी buua kibetikuarichutBe libas chudai kahanihedin saschodaiब्रा पंतय की दुकान पर सेक्स हिंदी स्टोरीजलुधियानाकी देशी चूत बिडियोhalala chudai kahaniyaबहिन की बनयान हिंदी सेक्स कहानीHindi bhabhi ko pehli baar gadhe ke land se sex storysexbaba.net बहु ससुर की चुदाई की कहानीट्रक मे चोदाने विडियोek. reshmi. ehsas. bur. chudai. storyचाची और बहन की चुदाईसंजू जी की चुदाई खुले खेत में पापा के लुंड से मेरी सिल टूटी कहानीasadharan rishton me chudaiMausi aur maa ki tubewel pr chudai ki भौजाई किवाड़ बंद नंगा चूतदीदी की गौरी मोटी गांड मेरा मोटा लण्ड खड़ा हो गयामाँ का दीवाना हिंदी सेक्स स्टोरीरस भरी चुतलंड चुतटिचर बोली मुझे दो मोटे लँड से चोदोNauvi kaksha ki antarvasnamameri bhabhiअचा चुतsex . रॅंड sexभाई ने ट्रक में चोद दिया स्टोरीभाईन बहन कि चुत मारीMummy ki saheli ki chudai ki kahaniyafarhin ki waterpark me chudai kahaniमूसल लड दीदी कूतियाKulfi ki jagah lund chusayaNurs ki jhante kahaniमेरे पड़ोस की पर्दानशीं लड़की ने मुझ पर भरोसा कियातीन मोटे लंड ममी कि अकेली चुत कहानीBra ki huk khol bhai se chudai Samuhik chudai m huva bura haalकाली चुतHinde.sixey.store.comxxxsarifबुआ और मम्मी की चुदाई कहानीpissab piya threesome hindi sex storiesट्रेन के सफर मे चुदाईगांड मारीमेरी कमला भाभी कि प्यास बझाईइंडियन मम्मी बेटा की chudae गाँव में कहानी हिन्दी मेंNauvi kaksha ki antarvasnaमौसी कि चूतलड़की की चूतचूत की बातMami ki nokri part 2 xxx suoriesXXNXX COM. मेरी चूत कि चमड़ी चाटने लगा सेक्सी विडियों मेरी मुस्लिम माँ की चुदाईसेक्सी वीडियो पंजाबी बोलते हुए सेक्स करतेबास कि चुदाईpapa ki pari chud gayi storyट्रेन में चुदाई कहानी नैन्सी भाभी की सेक्सी कहानीtayi ke chudaiyaबुर से पानी निकलते देखाभाभी को बीसतार पर लेटा कार देवर ने मारी गाडjawanladkichootmomedn sex khane chacheभाभी ने नौकरानी को पेलने में मदद कीममी पापा कि समुहिक चुदाइमुह मे मूत पेशाब पी sex story ,sexbaba.netMummy ki bra ki hook lagakr chudai ki